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राहु-केतु गोचर 2026
2026 में राहु और केतु की चाल: कब राशि बदलेंगे और हर चंद्र राशि से किन भावों में गोचर करेंगे। वास्तविक आकाश से गणना (निरयन लाहिड़ी, मध्यम राहु)।
- 2026 की शुरुआत में
- राहु कुंभ · केतु सिंह
18 मई 2025 से - 2026 में राशि परिवर्तन
- मकर · 5 दिस॰
- वक्री
- हमेशा वक्री
- अगला राशि परिवर्तन
- राहु धनु · केतु मिथुन — 24 जून 2028
2026 की तारीख़ें
| तारीख़ | समय (IST) | घटना |
|---|---|---|
| शनि, 5 दिस॰ 2026 | 10:33 pm | राहु का मकर में और केतु का कर्क में प्रवेश |
पंचांग लाहिड़ी अयनांश के थोड़े अलग मान लेते हैं, इसलिए शनि और गुरु के प्रकाशित समय में 15–45 मिनट और राहु-केतु में लगभग 3 घंटे तक का अंतर हो सकता है। तारीख़ें वही रहती हैं।
हर चंद्र राशि के लिए
भाव आपकी चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिने गए हैं, जैसे शास्त्रीय गोचर में। अपनी राशि जानें
मेष
- 5 दिस॰ तक:
राहु: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
वृषभ
- 5 दिस॰ तक:
राहु: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सहायक)
मिथुन
- 5 दिस॰ तक:
राहु: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सहायक) - 5 दिस॰ से:
राहु: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
कर्क
- 5 दिस॰ तक:
राहु: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
सिंह
- 5 दिस॰ तक:
राहु: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
कन्या
- 5 दिस॰ तक:
राहु: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
तुला
- 5 दिस॰ तक:
राहु: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक) - 5 दिस॰ से:
राहु: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
वृश्चिक
- 5 दिस॰ तक:
राहु: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
धनु
- 5 दिस॰ तक:
राहु: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
मकर
- 5 दिस॰ तक:
राहु: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
कुंभ
- 5 दिस॰ तक:
राहु: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है) - 5 दिस॰ से:
राहु: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
मीन
- 5 दिस॰ तक:
राहु: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
केतु: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सहायक) - 5 दिस॰ से:
राहु: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
केतु: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
इस गोचर का अर्थ
राहु और केतु चंद्रमा के पात (नोड) हैं: ये हमेशा उल्टी दिशा में चलते हैं, हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं और हर राशि में लगभग 18 महीने रहते हैं। शास्त्रीय गोचर में चंद्र राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में इनका गोचर सहायक माना गया है।
गोचर उन सभी लोगों का एक-सा होता है जिनकी चंद्र राशि एक है — बारह में से एक व्यक्ति — इसलिए आपकी अपनी कुंडली, लग्न और चल रही दशा इससे ज़्यादा तय करते हैं।
आपकी अपनी कुंडली पर असर
AI ज्योतिषी से पूछें कि यह गोचर आपकी अपनी कुंडली में क्या करता है: आपके लग्न और चंद्र से कौन-से भाव, और आपकी चल रही दशा। वार्षिक रिपोर्ट आपके साल के हर बड़े गोचर को कवर करती है।