गुरु गोचर 2027
2027 में गुरु (बृहस्पति) की चाल: कब राशि बदलेगा, कब वक्री और मार्गी होगा, और हर चंद्र राशि से किस भाव में गोचर करेगा। वास्तविक आकाश से गणना (निरयन लाहिड़ी)।
- 2027 की शुरुआत में
- सिंह
31 अक्टू॰ 2026 से - 2027 में राशि परिवर्तन
- कर्क · 25 जन॰, सिंह · 26 जून, कन्या · 26 नव॰
- वक्री
- 13 दिस॰ 2026 – 13 अप्रैल
- अगला राशि परिवर्तन
- सिंह — 28 फ़र॰ 2028
2027 की तारीख़ें
| तारीख़ | समय (IST) | घटना |
|---|---|---|
| सोम, 25 जन॰ 2027 | 1:29 am | गुरु वक्री होकर वापस कर्क में |
| मंगल, 13 अप्रैल 2027 | 7:43 am | गुरु मार्गी (22°45′ कर्क पर) |
| शनि, 26 जून 2027 | 5:15 am | गुरु का सिंह में प्रवेश |
| शुक्र, 26 नव॰ 2027 | 6:37 pm | गुरु का कन्या में प्रवेश |
पंचांग लाहिड़ी अयनांश के थोड़े अलग मान लेते हैं, इसलिए शनि और गुरु के प्रकाशित समय में 15–45 मिनट और राहु-केतु में लगभग 3 घंटे तक का अंतर हो सकता है। तारीख़ें वही रहती हैं।
हर चंद्र राशि के लिए
भाव आपकी चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिने गए हैं, जैसे शास्त्रीय गोचर में। अपनी राशि जानें
मेष
- 25 जन॰ तक: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 25 जन॰ – 26 जून: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 नव॰ से: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
वृषभ
- 25 जन॰ तक: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सहायक)
मिथुन
- 25 जन॰ तक: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 जून – 26 नव॰: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: चौथे भाव — घर, माता और मन की शांति (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
कर्क
- 25 जन॰ तक: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 25 जन॰ – 26 जून: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 नव॰ से: तीसरे भाव — साहस, भाई-बहन और संदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
सिंह
- 25 जन॰ तक: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: दूसरे भाव — धन, परिवार और वाणी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
कन्या
- 25 जन॰ तक: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 जून – 26 नव॰: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: पहले भाव — स्वयं, सेहत और आत्मविश्वास (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
तुला
- 25 जन॰ तक: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 25 जन॰ – 26 जून: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 नव॰ से: बारहवें भाव — खर्च, विश्राम और विदेश (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
वृश्चिक
- 25 जन॰ तक: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 जून – 26 नव॰: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: ग्यारहवें भाव — लाभ और मित्र (शास्त्रीय रूप से सहायक)
धनु
- 25 जन॰ तक: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 25 जन॰ – 26 जून: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 नव॰ से: दसवें भाव — करियर और प्रतिष्ठा (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
मकर
- 25 जन॰ तक: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 जून – 26 नव॰: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: नौवें भाव — भाग्य, गुरु और लंबी यात्रा (शास्त्रीय रूप से सहायक)
कुंभ
- 25 जन॰ तक: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 25 जन॰ – 26 जून: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 जून – 26 नव॰: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 नव॰ से: आठवें भाव — अचानक बदलाव और शोध (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
मीन
- 25 जन॰ तक: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 25 जन॰ – 26 जून: पाँचवें भाव — संतान, पढ़ाई और रचनात्मकता (शास्त्रीय रूप से सहायक)
- 26 जून – 26 नव॰: छठे भाव — काम, सेहत की दिनचर्या और विरोधी (शास्त्रीय रूप से सावधानी माँगता है)
- 26 नव॰ से: सातवें भाव — विवाह और साझेदारी (शास्त्रीय रूप से सहायक)
इस गोचर का अर्थ
गुरु हर राशि में लगभग एक साल रहता है। शास्त्रीय गोचर में चंद्र राशि से दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में गुरु सहायक माना गया है — विकास, पढ़ाई और पारिवारिक शुभ कार्य; बाकी भावों में काम के लिए ज़्यादा मेहनत चाहिए।
गोचर उन सभी लोगों का एक-सा होता है जिनकी चंद्र राशि एक है — बारह में से एक व्यक्ति — इसलिए आपकी अपनी कुंडली, लग्न और चल रही दशा इससे ज़्यादा तय करते हैं।
आपकी अपनी कुंडली पर असर
AI ज्योतिषी से पूछें कि यह गोचर आपकी अपनी कुंडली में क्या करता है: आपके लग्न और चंद्र से कौन-से भाव, और आपकी चल रही दशा। वार्षिक रिपोर्ट आपके साल के हर बड़े गोचर को कवर करती है।